नागपुर बना ड्रग्स तस्करों का अड्डा? “ऑपरेशन थंडर” पर उठे सवाल, सिविल लाइन क्षेत्र में खुलेआम गांजे की बिक्री!
क्राइम ऑपरेशन 10 एप्रिल 26
नागपुर- राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह शहर नागपुर में ड्रग्स तस्करी का जाल लगातार फैलता नजर आ रहा है। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन थंडर” के बावजूद सिविल लाइन जैसे संवेदनशील इलाके में चरस, गांजा और एमडी जैसे मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री होने के व्हिडिओ सामने आए हैं।
विधानभवन के सामने का झूग्गी परिसर बना अवैध धंधों का केंद्र!
सूत्रों के अनुसार, सिविल लाइन स्थित विधानभवन के सामने की झोपड़पट्टियों में बड़े पैमाने पर गांजे का बेखौप अवैध कारोबार चल रहा है। यहां न केवल खुदरा बल्कि थोक स्तर पर भी सप्लाई की जाने कि जानकारी सूत्र ने दी । दिनभर नशेड़ियों की आवाजाही और खुलेआम सेवन की घटनाएं सामने आ रही हैं।जिसके कारन शहर का युवा वर्ग नशे के लत में फसा हैं.
वाहतुक कार्यालय तक पहुंचा अवैध कारोबार!
चौंकाने वाली बात यह है कि वाहतुक कार्यालय के आसपास भी गांजा बिक्री का नेटवर्क सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक, एक महिला (बबली) द्वारा यहां गांजे की बिक्री किए जाने की जानकारी सामने आई है। लगातार पुलिस रेड से बचने के लिए इस स्थान को नया अड्डा बनाया जा रहा है।
तीन बड़े सप्लायरों के नाम चर्चा में!
सूत्रों के अनुसार, इस इलाके में गांजा सप्लाई मुख्य रूप से तीन जगहों से हो रही है:
गिट्टीखदान क्षेत्र से अफसर अंडे का लड़का,
यशोधरा नगर से एजाज और
गोवा कॉलोनी (सदर) से शकील
इन स्थानों से नियमित रूप से माल लाकर झोपड़पट्टियों में वितरित किया जा रहा है।
रेड से पहले ही लीक क्यो हो जाती है जानकारी?
पुलिस पर आरोप है कि जब भी एनडीपीएस पथक या क्राइम ब्रांच को सूचना दी जाती है,तो कार्रवाई से पहले ही तस्करों को इसकी भनक लग जाती है। हाल ही में एक मामले में बताया गया कि गांजे की खेप आने की सूचना अधिकारियों तक पहुंची, लेकिन रेड के दौरान आधा माल पहले ही हटा दिया गया था।
इसी तरह दिसंबर में चरस तस्करी के मामले में भी कार्रवाई से पहले आरोपी को सूचना मिलने का आरोप लगाया गया है।क्या इस तरह शहर में चल रहे अवैध धंदे बंद होंगे यह सवाल आम जनता पूछ रही हैं.
पुलिस की भूमिका पर सवाल!
बार-बार सूचना देने के बावजूद कार्रवाई असफल क्यों?
क्या अंदर से सूचना लीक हो रही है?
मुखबिरों की सुरक्षा पर सवाल!
सूत्रों का दावा है कि कुछ पुलिसकर्मी पैसों के लालच में जानकारी लीक कर रहे हैं, जिससे पूरे ऑपरेशन की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।ऐसा हुआ तो क्या ऑपरेशन थंडर सक्सेस होंगा?
वीडियो में कैद हुई गतिविधियां
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इलाके में गांजे की खरीद-फरोख्त के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें ग्राहक खुलेआम आकर माल लेते दिखाई दे रहे हैं। इससे साफ है कि तस्करों में पुलिस का डर कम होता जा रहा है।
संवेदनशील क्षेत्र में बढ़ता खतरा
यह पूरा इलाका विधानभवन, मनपा कार्यालय, रिजर्व बैंक क्वार्टर और स्कूल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के पास स्थित है। इसके बावजूद वर्षों से अवैध कारोबार जारी रहना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकार के दावों पर क्या असर होंगा!
मुंबई में चल रहे अधिवेशन के दौरान ड्रग्स तस्करी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।अब इस मामले को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ही ध्यान देकर शहर को बचाने कि मांग नागरिको ने कि.

नागपुर में “ऑपरेशन थंडर” के बावजूद ड्रग्स तस्करी का जारी रहना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इन आरोपों की जांच कर सख्त कार्रवाई करते हैं या नहीं।शहर में बढते अपराध और अवैध धंदे पर पुलिस आयुक्त ने कडे कदम उठाकर कारवाई करने कि मांग उठ रही हैं. अब देखना यह हैं कि शासन प्रशासन क्या कदम उठती इस पर सभी कि नजरे लगी हैं.
क्राइम ऑपरेशन ने समय समय पर गुन्हेशाखा तक अपराधी एव अवैध धंदे की जानकारी पहुचाने की कोशिश की ताकि पुलिस की मदत हो, लेकिन गुन्हेशाखा दी गई जानकारी बार बार लीक करने का काम पुलिस कर रही हैं, इसके पहले भी चरस विक्रेता की जानकारी लीक करके बड़ी रकम ली गई थी, ऐसा ही रहा तो कोई पुलिस को जानकारी देने की कोशिश नही करेंगे, ऐसी जानकारी गुन्हेशाखा के उपायुक्त को देकर उनसे प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की,
क्या कहते हैं क्राईम डिसिपी!
मेरे पास जो लोग हैं उनसे ही काम करवाना पड़ता है। एक दो बदमाश हो सकते हैं लेकिन काफी लोग अच्छा काम करते हैं। हम देखेंगे कि कोई ऐसा नहीं है तो पॉइंट आउट करके उसे बाहर निकाल देंगे।
श्री राहुल माकनीकर
पोलीस उपायुक्त (गुन्हेशाखा) नागपुर
