गुनाहो का अंत....!

गांजे के अवैध कारोबार पर पुलिस का नियंत्रण खत्म? कार्रवाई के नाम पर वसूली का खेल या फिर अपराधियों को खुली छूट!

गांजे के अवैध कारोबार पर पुलिस का नियंत्रण खत्म? कार्रवाई के नाम पर वसूली का खेल या फिर अपराधियों को खुली छूट!

° हमीद नगर मुस्लिम कब्रिस्तान के पास दो जगहों पर धड़ल्ले से गांजे की बिक्री! रोजाना 4 से 5 किलो गांजा बिकने की सूचना, छोटे बच्चों से बिक्री कराने का भी आरोप!

°डीबी स्क्वॉड पहुंचा, लेकिन कार्रवाई का अता-पता नहीं! आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है गांजे का कारोबार?

क्राइम ऑपरेशन – 4 नवंबर 2026

नागपुर। शहर में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं। ड्रग्स के बड़े कारोबार पर शिकंजा कसने के बाद शहर के कुछ हिस्सों में इस अवैध धंधे में कमी जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन इसका फायदा अब कुछ गांजा विक्रेता उठाते नजर आ रहे हैं। कहीं मादक पदार्थों का कारोबार बंद दिखाई देता है, तो कहीं पुलिस थाने की नाक के नीचे खुलेआम गांजे की बिक्री होने की सूचनाएं सामने आ रही हैं।

सवाल यह है कि जब पुलिस आयुक्त विश्वाश नागरे पाटिल ने मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं, तो फिर उन्हीं के अधीन आने वाले पुलिस थानों के क्षेत्रों में गांजे का कारोबार आखिर किसके भरोसे चल रहा है?

यशोधरानगर पुलिस थाना बना गांजा कारोबारियों के लिए सुरक्षित ठिकाना?

यशोधरानगर पुलिस थाने की हद में गांजे की बिक्री के अलग-अलग ठिकानों को लेकर लगातार शिकायतें और सूचनाएं सामने आ रही हैं। यशोधरानगर चौक, हमीद नगर मुस्लिम कब्रिस्तान, म्हाडा क्वार्टर माजरी, राजीव गांधी नगर और लालझेंडा चौक जैसे इलाकों में गांजे की बिक्री होने की जानकारी सामने आई थी।

इनमें लालझेंडा चौक के गांजा कारोबार पर एनडीपीएस विभाग द्वारा पिछली बार कार्रवाई की गई थी। वहीं यशोधरानगर चौक पर फिलहाल गांजे की बिक्री बंद होने की जानकारी है। लेकिन एक जगह कारोबार बंद होने के बाद इसका फायदा दूसरे विक्रेता उठाते दिखाई दे रहे हैं।

हमीद नगर मुस्लिम कब्रिस्तान के पास चल रहे गांजे के दो कथित ठिकाने इन दिनों चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, यहां रोजाना करीब 4 से 5 किलो गांजे की बिक्री होने की जानकारी सामने आई है। इतना ही नहीं, इस अवैध कारोबार में छोटे-छोटे बच्चों का इस्तेमाल कर उनसे गांजे की बिक्री करवाए जाने का भी गंभीर आरोप है।

यदि इन सूचनाओं में सच्चाई है, तो यह केवल मादक पदार्थों की बिक्री का मामला नहीं, बल्कि बच्चों को भी अपराध की दुनिया में धकेलने का गंभीर विषय है।

क्राइम ऑपरेशन की पड़ताल के बाद पुलिस को दी जानकारी, फिर भी कार्रवाई पर सवाल!

हमीद नगर मुस्लिम कब्रिस्तान के पास चल रहे गांजे के कारोबार की जानकारी मिलने के बाद क्राइम ऑपरेशन ने अपने स्तर पर इसकी पड़ताल की। इसके लिए कुछ प्रतिनिधियों को पैसे देकर गांजा खरीदने भेजा गया। गांजे का पैकेट प्राप्त होने के बाद इस पूरे मामले की जानकारी यशोधरानगर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से दी गई।

साथ ही उनसे इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया भी मांगी गई।

वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक की ओर से तपास पथक भेजकर कार्रवाई करने की बात कही गई। इसके बाद पुलिस का तपास पथक मौके पर पहुंचा भी। लेकिन यहां से शुरू होता है एक बड़ा सवाल!

क्राइम ऑपरेशन को मिली जानकारी के अनुसार, मौके पर पहुंचा पुलिस दल डीबी स्क्वॉड था। लेकिन जिस गांजे के कारोबार की जानकारी पुलिस को दी गई थी, उस पर कोई स्पष्ट कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी।

आरोप है कि पुलिस दल के मौके पर पहुंचने के बावजूद गांजे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और टीम वापस लौट गई।

अब सवाल यह है कि आखिर पुलिस को गांजे की बिक्री की जानकारी देने और मौके पर टीम भेजे जाने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या पुलिस को कारोबार की जानकारी नहीं थी? क्या मौके पर पहुंची टीम ने वास्तविकता की जांच की? या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई?

स्थानीय स्तर पर पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से अवैध कारोबारियों से आर्थिक लेन-देन किए जाने की आशंकाएं भी उठ रही हैं। हालांकि, इस संबंध में स्वतंत्र जांच और ठोस प्रमाण के बिना किसी पर वसूली में शामिल होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

लेकिन यदि पुलिस को सूचना मिलने के बाद भी कारोबार जारी रहता है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

प्रवेशनगर का एनआईटी गार्डन बना गांजा सेवन करने वालों का अड्डा!

यशोधरानगर पुलिस थाने की हद में आने वाला प्रवेशनगर स्थित एनआईटी गार्डन अब एक अलग ही समस्या को लेकर चर्चा में है।

स्थानीय नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार, शाम होते ही कुछ कबाड़ी और ऑटो चालक गार्डन परिसर में जमा होकर बैठते हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोग खुलेआम गांजे का सेवन करते हैं और गार्डन को नशा करने का अड्डा बना दिया गया है।

इससे परिसर के आसपास रहने वाले नागरिकों और विशेषकर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गार्डन में परिवारों और महिलाओं का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में यदि नशा करने वालों का जमावड़ा लगातार बढ़ता रहा, तो महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अन्य अप्रिय घटनाओं की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

स्थानीय नागरिकों में ऐसे लोगों के व्यवहार को लेकर भय का माहौल होने की बात सामने आ रही है।

अब सवाल यह है कि सार्वजनिक उद्यानों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या पुलिस गश्त केवल मुख्य सड़कों तक सीमित रह गई है? क्या शाम के समय ऐसे संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की नियमित निगरानी नहीं होनी चाहिए?

सीपी के सख्त निर्देश, लेकिन थानों में अमल कब?

नागपुर में अगले महीने विधानसभा का शीतकालीन अधिवेशन होने जा रहा है। राज्य के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह गृह शहर है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में शहर के विभिन्न इलाकों में मादक पदार्थों और अन्य अवैध कारोबारों को लेकर सामने आ रही शिकायतें पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।

नागपुर शहर पुलिस की कमान पुलिस आयुक्त विश्वाश नागरे पाटिल के हाथों में है। उनके नाम में भले ही ‘विश्वाश’ हो, लेकिन उनके अधीन आने वाले कुछ पुलिस थानों की कार्यप्रणाली पर नागरिकों का विश्वास कायम रखने की चुनौती दिखाई दे रही है।

यशोधरानगर पुलिस थाने के क्षेत्र में सामने आ रही गांजे की बिक्री और सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने की शिकायतें इसी व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही हैं।

पुलिस प्रशासन केवल निर्देश जारी करने और कार्रवाई के दावे करने तक सीमित न रहे, बल्कि उन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना पालन हो रहा है, इसकी भी समीक्षा करे।

अब पुलिस आयुक्त विश्वाश नागरे पाटिल से सीधे सवाल हैं —

1) हमीद नगर मुस्लिम कब्रिस्तान के पास गांजे की बिक्री के आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी?

2) रोजाना 4 से 5 किलो गांजे की बिक्री होने की सूचना पर एनडीपीएस विभाग और स्थानीय पुलिस क्या कार्रवाई करेंगे?

3) यदि छोटे बच्चों से गांजे की बिक्री कराई जा रही है, तो उन्हें इस अपराध से बचाने के लिए कौन कदम उठाएगा?

4) सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे डीबी स्क्वॉड की भूमिका की जांच होगी या नहीं?

5) प्रवेशनगर एनआईटी गार्डन में शाम के समय पुलिस गश्त और सीसीटीवी निगरानी कब बढ़ाई जाएगी?

अवैध कारोबार बंद करने के दावे बहुत हुए, अब जमीन पर कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए!

आखिर यशोधरानगर पुलिस थाने की हद में चल रहे गांजे के कथित कारोबार पर पुलिस कब शिकंजा कसेगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर अवैध कारोबारियों का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा?

क्राइम ऑपरेशन की पड़ताल जारी है…
अगले अंक में इस मामले से जुड़े और भी महत्वपूर्ण सवालों के साथ!