गुनाहो का अंत....!

मिशन बहुजन आंदोलन मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की एंट्री!  नागपुर पुलिस आयुक्त को नोटिस; 15 दिनों में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

मिशन बहुजन आंदोलन मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की एंट्री!  नागपुर पुलिस आयुक्त को नोटिस; 15 दिनों में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

राकेश धारगावे की शिकायत पर NCSC ने लिया संज्ञान, आंदोलन के बाद दर्ज एफआईआर पर उठे सवाल

क्राइम ऑपरेशन 12 जून 202

नागपुर: मिशन बहुजन संगठन के आंदोलन के बाद कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए आपराधिक मामले की अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंज सुनाई देने लगी है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने मामले का संज्ञान लेते हुए नागपुर शहर के पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंघल को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

यह कार्रवाई मिशन बहुजन संगठन के अध्यक्ष राकेश धारगावे द्वारा आयोग को की गई शिकायत के बाद की गई है। आयोग द्वारा मामले की जांच शुरू किए जाने से अब पुलिस की कार्रवाई और आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन और पत्रकार विजय खवसे से जुड़े मामलों में न्याय की मांग को लेकर मिशन बहुजन संगठन ने 4 अप्रैल 2026 को संविधान चौक पर आंदोलन किया था। संगठन का दावा है कि आंदोलन के लिए संबंधित प्रशासन को विधिवत अनुमति आवेदन दिया गया था तथा उसकी प्राप्ति रसीद भी ली गई थी। संगठन का यह भी कहना है कि आंदोलन पर रोक संबंधी कोई लिखित आदेश पुलिस की ओर से नहीं दिया गया था।

इसके बावजूद बर्डी पुलिस ने संगठन के अध्यक्ष राकेश धारगावे सहित 12 कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए धारगावे ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटाया।

आयोग को 8 जून 2026 को प्राप्त शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए मामले की जांच शुरू करने का निर्णय लिया। आयोग ने नागपुर पुलिस आयुक्त से घटना का पूरा विवरण, दर्ज अपराध की जानकारी, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, गिरफ्तारी अथवा आरोपपत्र की स्थिति तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि शिकायतकर्ताओं के अनुसार नागपुर के कुछ चर्चित मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इससे पूर्व पत्रकार विजय खवसे प्रकरण और इंदोरा के वासनिक परिवार से जुड़े मामले में भी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया था। अब राकेश धारगावे की शिकायत पर कार्रवाई होने से इस मामले पर शहर ही नहीं बल्कि राज्यभर की निगाहें टिक गई हैं।

फिलहाल नागपुर पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति और आगे की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

  • 1. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की नागपुर पुलिस को नोटिस, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट
    2. मिशन बहुजन आंदोलन के बाद दर्ज एफआईआर पर NCSC का संज्ञान
    3. राकेश धारगावे की शिकायत पर आयोग सख्त, पुलिस आयुक्त से मांगा जवाब
    4. आंदोलनकारियों पर कार्रवाई का मामला पहुंचा दिल्ली, राष्ट्रीय आयोग ने शुरू की जांच
    5. नागपुर पुलिस की कार्रवाई पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की नजर, मांगी पूरी जानकारी

“आंदोलन की अनुमति होने के दावे के बीच दर्ज हुआ मामला, आयोग ने मांगे सभी दस्तावेज और कार्रवाई का ब्योरा”