गुनाहो का अंत....!

महिलाएं बनीं गांजा कारोबार की ढाल, शहर में खुलेआम बिक रहा नशा

महिलाएं बनीं गांजा कारोबार की ढाल, शहर में खुलेआम बिक रहा नशा

पुलिस की रेड से पहले ही लीक हो रही जानकारी? सवालों के घेरे में विभागीय सिस्टम

क्राइम ऑपरेशन | 13 मई 2026

नागपुर शहर में मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन यह कार्रवाई महज़ 190 ग्राम गांजा जब्ती तक सीमित रह गई। शहरभर में सैकड़ों स्थानों पर दबिश देने के बावजूद पुलिस को अपेक्षित सफलता नहीं मिलना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
शहर में खुलेआम चल रहे गांजा और अन्य मादक पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंगल के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया गया। आला अधिकारियों के साथ कई इलाकों में छापेमारी भी हुई, लेकिन अधिकतर स्थानों पर पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।
इसी बीच, क्राइम ऑपरेशन न्यूज़ की टीम ने शहर में स्वतंत्र रूप से किए गए स्टिंग ऑपरेशन में कई ऐसे ठिकानों का खुलासा किया, जहां महिलाएं खुलेआम गांजा बेचती कैमरे में कैद हुईं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि अब असली अपराधी खुद सामने आने के बजाय महिलाओं को आगे कर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं।

क्या पुलिस रेड की जानकारी पहले ही लीक हो रही है?

शहर में लगातार असफल हो रही छापेमारी के बाद अब पुलिस विभाग के भीतर से जानकारी लीक होने की आशंका भी गहराती जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पुलिस जहां-जहां दबिश देती है, वहां पहले से आरोपी कैसे गायब हो जाते हैं?
सूत्रों की मानें तो कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मी और विभागीय मुखबिर मादक पदार्थ विक्रेताओं को पहले ही रेड की सूचना पहुंचा देते हैं। यही वजह है कि बड़े पैमाने पर कार्रवाई होने के बावजूद पुलिस को ठोस सफलता नहीं मिल पा रही।

विधानभवन के सामने खुलेआम गांजा बिक्री, महिलाएं कर रहीं सप्लाई

क्राइम ऑपरेशन टीम ने शहर के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक, विधानभवन परिसर के सामने स्टिंग ऑपरेशन किया। यहां खुलेआम गांजा बेचने का वीडियो रिकॉर्ड किया गया।

कुछ दिन पहले इसी इलाके में पुलिस आयुक्त द्वारा रेड की गई थी, लेकिन कार्रवाई से पहले ही जानकारी लीक होने की बात सामने आई। सूचना मिलते ही कई विक्रेता भूमिगत हो गए थे और पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।
लेकिन क्राइम ऑपरेशन द्वारा किए गए स्टिंग में साफ दिखाई दिया कि एक महिला कुर्सी पर बैठकर गांजा बेच रही है। ग्राहक जब 100 रुपये का पैकेट मांगता है, तो महिला बताती है कि उसके पास केवल 200 और 500 रुपये वाले पैकेट हैं। इसके बाद ग्राहक को दूसरे विक्रेता के पास भेजा जाता है, जहां एक युवती खुलेआम 100 रुपये का गांजा पैकेट देती कैमरे में कैद हुई।

गणेशपेठ क्षेत्र में महिलाओं की आड़ में चल रहा कारोबार

गणेशपेठ पुलिस थाना क्षेत्र के हज हाउस के पीछे स्थित इलाके में भी गांजा बिक्री का बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार पहले यह धंधा ताजबाग क्षेत्र के एक नामी तस्कर से जुड़ा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से महिलाओं के माध्यम से इस कारोबार को संचालित किया जा रहा है।
क्राइम ऑपरेशन की टीम ने यहां भी वीडियो रिकॉर्डिंग की, जिसमें एक छोटी दुकान की आड़ में महिलाएं गांजा बेचती दिखाई दीं। इस स्थान पर पहले भी पुलिस कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन हर बार कुछ दिनों बाद धंधा फिर शुरू हो जाता है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एनडीपीएस विभाग को इन ठिकानों की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

पाचपावली में वर्षों से सक्रिय ‘लावा’, पुलिस पर संरक्षण के आरोप

पाचपावली थाना क्षेत्र के बंगाली पंजा, गुप्ता चौक इलाके में “लावा” नामक व्यक्ति पर वर्षों से गांजा बेचने के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी बिना किसी डर के खुलेआम कारोबार कर रहा है।
स्टिंग ऑपरेशन में एक ग्राहक को गांजा खरीदते हुए रिकॉर्ड किया गया। ग्राहक “माल कैसा है?” पूछता है, जिस पर विक्रेता “अच्छा है” कहकर 100 और 500 रुपये के पैकेट देने की बात करता है। पैसे लेने के बाद आरोपी गली में जाता है और कुछ देर बाद गांजा पैकेट लेकर लौटता है।
क्राइम ऑपरेशन का दावा है कि इस संबंध में कई बार संबंधित पुलिस निरीक्षक को जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल उठ रहा है कि क्या स्थानीय पुलिस अपने कर्तव्य से पीछे हट रही है या फिर विभागीय स्तर पर किसी प्रकार का संरक्षण दिया जा रहा है?

कोतवाली पुलिस की कार्रवाई, महिला गिरफ्तार

कोतवाली थाना क्षेत्र में वर्षों से चल रहे गांजा और चरस के कारोबार पर आखिरकार पुलिस निरीक्षक रितेश अहीर ने कार्रवाई करते हुए एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार जनवरी महीने से इस अवैध कारोबार पर नजर रखी जा रही थी। आरोपी पक्ष ने इलाके के दोनों रास्तों पर अपने लोग बैठा रखे थे, जिससे पुलिस की गतिविधियों की जानकारी पहले ही मिल जाती थी।
काफी समय तक असफल रहने के बाद आखिरकार पुलिस ने रणनीति बदलकर कार्रवाई की और महिला आरोपी को गिरफ्तार किया। वीडियो में महिला खुलेआम कुर्सी पर बैठकर गांजा बेचती दिखाई दे रही है।

महिलाएं क्यों बन रही हैं मादक पदार्थ कारोबार का चेहरा?

शहर में सामने आए मामलों से साफ है कि अब अपराधी खुद सामने आने के बजाय महिलाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पुलिस कार्रवाई के दौरान सहानुभूति और कानूनी जटिलताओं का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।

लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है — यदि शहर के आम नागरिक और मीडिया स्टिंग ऑपरेशन कर इन अवैध कारोबारों तक पहुंच सकते हैं, तो पुलिस और एनडीपीएस विभाग इन्हें स्थायी रूप से खत्म क्यों नहीं कर पा रहे?
अब देखना यह होगा कि पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंगल केवल विक्रेताओं पर कार्रवाई करते हैं या फिर विभाग के भीतर बैठे उन लोगों पर भी सख्ती होगी, जिन पर जानकारी लीक करने और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं।

पोलीस आयुक्त रवींद्र सिंगल के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे “ऑपरेशन थंडर” और मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार की जा रही कार्रवाई के दावों की हकीकत शहर में खुलेआम जारी इन अवैध धंधों ने उजागर कर दी है।
शहर के विभिन्न इलाकों में आज भी जिस तरह खुलेआम गांजा और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री जारी है, उसे देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर “ऑपरेशन थंडर” को वास्तविक रूप से कितनी सफलता मिली? पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए दावे आखिर जमीन पर कितने सच साबित हुए?
अगर पुलिस की लगातार रेड, सर्च ऑपरेशन और विशेष अभियान के बावजूद महिलाएं खुलेआम कुर्सी पर बैठकर गांजा बेच रही हैं, ग्राहक बेखौफ मादक पदार्थ खरीद रहे हैं और पुराने तस्करों के नेटवर्क आज भी सक्रिय हैं, तो यह स्थिति पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।
शहर में चल रहे इन मादक पदार्थों के धंधों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार्रवाई के दावों और जमीनी हकीकत में कितना बड़ा अंतर मौजूद है।
यह सीधा सवाल पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंगल और पूरे पुलिस प्रशासन से है —
यदि ऑपरेशन इतने प्रभावी हैं, तो शहर में मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री अब तक बंद क्यों नहीं हुई?
क्या कार्रवाई केवल कागजों और प्रेस नोट तक सीमित है, या फिर वास्तव में इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की ठोस रणनीति तैयार की जा रही है?