वेटनरी चौक पर पुलिस कार्रवाई के बाद भी बेखौफ सट्टा कारोबार जारी!
• हजारी पहाड़ के सट्टा नेटवर्क में पुलिसकर्मी की भूमिका की चर्चा, निष्पक्ष जांच की मांग
क्राइम ऑपरेशन-11 जुन 2026
विशेष रिपोर्ट
नागपुर : गिट्टीखदान थाना क्षेत्र के वेटनरी चौक पर हाल ही में पुलिस कार्रवाई होने के बावजूद अवैध सट्टा कारोबार फिर से शुरू होने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों और क्राइम ऑपरेशन की पड़ताल में यह दावा किया जा रहा है कि सट्टा संचालकों ने केवल स्थान बदला है, कारोबार बंद नहीं किया है।
क्राइम ऑपरेशन न्यूज़ को 26 मई को सूचना मिली थी कि वेटनरी चौक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सट्टा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सूचना की पुष्टि के लिए टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उस दौरान सड़क किनारे बनाई गई एक झोपड़ी में सट्टा कारोबार संचालित होता दिखाई दिया था। वहां कई युवक कथित रूप से सट्टे की लगवाड़ी लिखते हुए दिखाई दिए थे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह कथित अवैध गतिविधि क्राइम यूनिट क्रमांक-3 के कार्यालय से बेहद कम दूरी पर संचालित होने का दावा किया गया। इसके बाद क्राइम ऑपरेशन द्वारा संबंधित वरिष्ठ अधिकारी को जानकारी दी गई थी। बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 16 लोगों पर कार्रवाई की और प्रेस नोट भी जारी किया था।
कार्रवाई के बाद फिर शुरू हुआ कारोबार?
क्राइम ऑपरेशन की टीम ने पुनः क्षेत्र का दौरा किया तो दावा किया गया कि सट्टा कारोबार पहले की तरह जारी है। हालांकि इस बार संचालकों ने पुराना स्थान छोड़कर उसी क्षेत्र में सामने की ओर एक नया झोपड़ा बनाकर गतिविधियां शुरू कर दी हैं।
स्थानीय नागरिकों के बीच सवाल उठ रहा है कि यदि पहले कार्रवाई हो चुकी है, तो क्या पुलिस और संबंधित क्राइम यूनिट को इस नए ठिकाने की जानकारी नहीं है, या फिर कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है?
हजारी पहाड़ में भी सक्रिय नेटवर्क
जांच के दौरान टीम को जानकारी मिली कि वेटनरी चौक से कुछ दूरी पर स्थित हजारी पहाड़ क्षेत्र में भी लंबे समय से सट्टा गतिविधियां संचालित होने की चर्चा है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर जब टीम वहां पहुंची तो पुराना स्थान खाली मिला। पूछताछ करने पर कुछ स्थानीय लोगों ने कथित रूप से बताया कि गतिविधियां अब दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दी गई हैं।
बताए गए स्थान पर पहुंचने पर जंगलनुमा क्षेत्र में कुछ लोगों की गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया गया। सूत्रों के अनुसार वहां निगरानी के लिए अलग-अलग स्थानों पर युवकों को बैठाया जाता है तथा अंदर बैठकर सट्टा लिखने का काम किया जाता है।
पुलिसकर्मी की भूमिका की चर्चा, जांच जरूरी
क्षेत्र में यह चर्चा भी सुनने को मिल रही है कि इस नेटवर्क के पीछे किसी पुलिसकर्मी का संरक्षण हो सकता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। क्राइम ऑपरेशन का मानना है कि यदि ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं तो पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता जनता के सामने लानी चाहिए।
यदि किसी पुलिसकर्मी का नाम अवैध कारोबार से जोड़ा जा रहा है, तो उसकी स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है। वहीं यदि आरोप निराधार हैं, तो उन्हें भी स्पष्ट रूप से खारिज किया जाना चाहिए।
ऑपरेशन थंडर पर भी उठे सवाल
नागपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन थंडर” का उद्देश्य अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना बताया गया है। लेकिन यदि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही वही गतिविधियां नए स्थान से शुरू हो जाती हैं, तो अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर हैं। क्या वेटनरी चौक और हजारी पहाड़ क्षेत्र में चल रही कथित सट्टा गतिविधियों की फिर से जांच होगी? क्या आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल कर जिम्मेदार लोगों को बेनकाब किया जाएगा? और क्या ऑपरेशन थंडर का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देगा?
इन सवालों के जवाब का इंतजार नागपुर शहर की जनता को है।

क्राइम ऑपरेशन न्यूज़ ने 9 जून 2026 को शहर में चल रहे कथित सट्टा कारोबार की जानकारी संबंधित पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराई थी। इस संबंध में क्राइम यूनिट-3, पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों, पुलिस आयुक्त रविंद्र सिंगल तथा पुलिस महासंचालक सदानंद दाते से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास किया गया, किन्तु समाचार लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।
अवैध कारोबार की शिकायतों पर वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी को लेकर नागरिकों में सवाल उठ रहे हैं। अब यह मामला राज्य के गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संज्ञान में लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
(नोट: यदि किसी संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
(नोट : पुलिसकर्मी के संबंध में लगाए गए आरोप स्थानीय सूत्रों और चर्चाओं पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।)
